📚 यण् सन्धिः
कक्षा १० • संस्कृत व्याकरण • सन्धि
📖 यण् सन्धेः परिभाषा
इक् अर्थात् इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ के बाद यदि
कोई भिन्न स्वर आता है, तो क्रमशः य्, व्, र्, ल् हो जाता है।
इसे यण् सन्धिः कहते हैं।
🔹 यण् सन्धेः मुख्य नियमाः
1. इ / ई
इ / ई + अन्य स्वर → य्
उदाहरण — इति + आदि = इत्यादि
2. उ / ऊ
उ / ऊ + अन्य स्वर → व्
उदाहरण — सु + आगतम् = स्वागतम्
3. ऋ / ॠ
ऋ / ॠ + अन्य स्वर → र्
उदाहरण — पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
4. ऌ
ऌ + अन्य स्वर → ल्
ऌकार के प्रयोग के उदाहरण अत्यल्प हैं।
🧠 सरल सूत्र
इ / ई → य् |
उ / ऊ → व् |
ऋ / ॠ → र् |
ऌ → ल्
⭐ याद रखें:
जब इ, ई, उ, ऊ, ऋ आदि के बाद कोई दूसरा स्वर आता है,
तब उनके स्थान पर क्रमशः य्, व्, र् आदि हो जाते हैं।
📝 यण् सन्धिः — ५० उदाहरणाः
| क्र. | सन्धि-विच्छेदः | सन्धिः | वाक्यम् |
|---|---|---|---|
| १ | इति + आदि | इत्यादि | इत्यादि विषयाः पठनीयाः। |
| २ | यदि + अपि | यद्यपि | यद्यपि सः बालकः अस्ति तथापि बुद्धिमान् अस्ति। |
| ३ | प्रति + एकम् | प्रत्येकम् | प्रत्येकं छात्रः पठति। |
| ४ | प्रति + उत्तरम् | प्रत्युत्तरम् | सः प्रश्नस्य प्रत्युत्तरं ददाति। |
| ५ | अति + अधिकम् | अत्यधिकम् | अत्यधिकं जलं न पातव्यम्। |
| ६ | अति + उत्तमम् | अत्युत्तमम् | एतत् अत्युत्तमं कार्यम् अस्ति। |
| ७ | अभि + आगतम् | अभ्यागतम् | अभ्यागतं जनं सत्कुर्यात्। |
| ८ | अभि + उदयः | अभ्युदयः | देशस्य अभ्युदयः भवतु। |
| ९ | अधि + अक्षः | अध्याक्षः | अध्याक्षः सभां चालयति। |
| १० | अधि + अयनम् | अध्ययनम् | छात्राः मनोयोगेन अध्ययनं कुर्वन्ति। |
| ११ | इति + एव | इत्येव | इत्येव गुरुः अवदत्। |
| १२ | यदि + एव | यद्येव | यद्येव सत्यं तर्हि वद। |
| १३ | कवि + आलयः | कव्यालयः | कव्यालये कविताः सन्ति। |
| १४ | शक्ति + अस्त्रम् | शक्त्यस्त्रम् | शक्त्यस्त्रं वीरस्य आयुधम् अस्ति। |
| १५ | मति + अनुसारम् | मत्यनुसारम् | मत्यनुसारं निर्णयः भवति। |
| १६ | नदी + अत्र | नद्यत्र | नद्यत्र निर्मला अस्ति। |
| १७ | श्री + अनन्तः | श्र्यनन्तः | श्र्यनन्तस्य नाम प्रसिद्धम्। |
| १८ | रवि + उदयः | रव्युदयः | रव्युदये जनाः जागरन्ति। |
| १९ | गिरि + उपरि | गिर्युपरि | गिर्युपरि मन्दिरम् अस्ति। |
| २० | हरि + अर्चना | हर्यर्चना | हर्यर्चना भक्त्या क्रियते। |
| २१ | सु + आगतम् | स्वागतम् | भवतः स्वागतम् अस्ति। |
| २२ | सु + अस्ति | स्वस्ति | सर्वेभ्यः स्वस्ति भवतु। |
| २३ | अनु + एषणम् | अन्वेषणम् | छात्राः विषयस्य अन्वेषणं कुर्वन्ति। |
| २४ | अनु + अयः | अन्वयः | शब्दानां अन्वयः करणीयः। |
| २५ | सु + अस्ति | स्वस्ति | लोकानां स्वस्ति भवतु। |
| २६ | अनु + इतः | अन्वितः | सः गुणैः अन्वितः अस्ति। |
| २७ | बहु + अर्थः | बह्वर्थः | अस्य शब्दस्य बह्वर्थः अस्ति। |
| २८ | गुरु + आदेशः | गुर्वादेशः | गुर्वादेशः सदैव पालनीयः। |
| २९ | लघु + आहारः | लघ्वाहारः | लघ्वाहारः स्वास्थ्याय हितकरः। |
| ३० | मधु + आलयः | मध्वालयः | मध्वालये मधु सुलभम् अस्ति। |
| ३१ | वधू + आगमनम् | वध्वागमनम् | वध्वागमनं हर्षजनकम् अस्ति। |
| ३२ | भानु + उदयः | भान्वुदयः | भान्वुदये कमलानि विकसन्ति। |
| ३३ | साधु + आचारः | साध्वाचारः | साध्वाचारः सर्वैः पालनीयः। |
| ३४ | पितृ + आदेशः | पित्रादेशः | पित्रादेशः पुत्रेण पालनीयः। |
| ३५ | मातृ + आज्ञा | मात्राज्ञा | मात्राज्ञा बालकेन पालनीया। |
| ३६ | पितृ + अर्थम् | पित्रर्थम् | सः पित्रर्थं कार्यं करोति। |
| ३७ | मातृ + उपदेशः | मात्रुपदेशः | मात्रुपदेशः हितकरः अस्ति। |
| ३८ | पितृ + उपकारः | पित्रुपकारः | पित्रुपकारः स्मरणीयः अस्ति। |
| ३९ | कर्तृ + आदेशः | कर्त्रादेशः | कर्त्रादेशः सर्वैः मान्यः। |
| ४० | भ्रातृ + आगमनम् | भ्रात्रागमनम् | भ्रात्रागमने सर्वे प्रसन्नाः अभवन्। |
| ४१ | इति + उक्तम् | इत्युक्तम् | गुरुणा इत्युक्तम्। |
| ४२ | प्रति + आभरणम् | प्रत्याभरणम् | प्रत्याभरणं शोभनम् अस्ति। |
| ४३ | अति + आचारः | अत्याचारः | अत्याचारः कदापि न करणीयः। |
| ४४ | अति + आवश्यकम् | अत्यावश्यकम् | जलम् अत्यावश्यकम् अस्ति। |
| ४५ | अभि + आगमनम् | अभ्यागमनम् | अतिथेः अभ्यागमनं जातम्। |
| ४६ | अभि + अन्तरम् | अभ्यन्तरम् | गृहस्य अभ्यन्तरं स्वच्छम् अस्ति। |
| ४७ | उप + इन्द्रः | उपेन्द्रः | उपेन्द्रः विष्णोः नाम अस्ति। |
| ४८ | सु + ईक्षणम् | स्वीक्षणम् | कार्यस्य स्वीक्षणं करणीयम्। |
| ४९ | अनु + एषणम् | अन्वेषणम् | वैज्ञानिकाः नूतनस्य ज्ञानस्य अन्वेषणं कुर्वन्ति। |
| ५० | प्रति + अक्षम् | प्रत्यक्षम् | प्रत्यक्षं प्रमाणं महत्त्वपूर्णम् अस्ति। |
⭐ परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण सूत्र
इ + स्वर = य् → इत्यादि
ई + स्वर = य् → प्रत्युत्तरम्
उ + स्वर = व् → अन्वेषणम्
ऊ + स्वर = व् → वध्वागमनम्
ऋ + स्वर = र् → पित्रादेशः
ई + स्वर = य् → प्रत्युत्तरम्
उ + स्वर = व् → अन्वेषणम्
ऊ + स्वर = व् → वध्वागमनम्
ऋ + स्वर = र् → पित्रादेशः