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CLASS_8_PPT_8_पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

कक्षा 8 • संस्कृत

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

पाठ 8 — पूर्वोत्तर भारत का मनोहर परिचय

शब्दार्थ • पाठ-विषय • संस्कृत सामग्री • अभ्यास • प्रश्नोत्तर • MCQ

पाठ का परिचय

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् पाठ में भारत के उत्तर-पूर्वी भाग की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक तथा भौगोलिक विशेषताओं का परिचय प्रस्तुत किया गया है।

इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न राज्यों, उनकी प्राकृतिक सुंदरता तथा सांस्कृतिक विशेषताओं को समझने का अवसर मिलता है।

📊 कक्षा 8 संस्कृत पाठ 8 की PPT

इस पाठ को कक्षा में आकर्षक ढंग से पढ़ाने के लिए पाठ की विस्तृत PowerPoint Presentation उपलब्ध है।

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पाठ 8 – पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् : संक्षिप्त जानकारी

कक्षा

कक्षा 8 संस्कृत

पाठ

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

मुख्य विषय

पूर्वोत्तर भारत, प्रकृति, संस्कृति और भूगोल

भाषा

संस्कृत

🌏 पूर्वोत्तर भारत के राज्य

पाठ में भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के राज्यों का परिचय दिया गया है। पूर्वोत्तर भारत को प्राकृतिक सौन्दर्य, पर्वतों, नदियों, वनों, जनजातीय संस्कृति तथा विविध परम्पराओं के लिए जाना जाता है।

1. असम

असम पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य है।

2. अरुणाचल प्रदेश

पर्वतीय प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध राज्य।

3. मेघालय

पर्वतों, जलप्रपातों और हरित प्राकृतिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध।

4. मणिपुर

प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक विविधता वाला पूर्वोत्तर राज्य।

5. मिजोरम

पहाड़ी भू-भाग और प्राकृतिक सौन्दर्य से युक्त राज्य।

6. नागालैण्ड

विविध जनजातीय परम्पराओं एवं संस्कृति के लिए प्रसिद्ध।

7. त्रिपुरा

पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य।

8. सिक्किम

हिमालयी प्राकृतिक सौन्दर्य से सम्पन्न राज्य।

👭 सप्तभगिन्यः

पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को सामूहिक रूप से “सप्तभगिन्यः” कहा जाता है।

ये सात राज्य हैं — असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैण्ड और त्रिपुरा।

सिक्किम को पाठ के संदर्भ में पूर्वोत्तर क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

💬 पाठ का संवाद

पाठ में विद्यार्थियों के मध्य पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के संबंध में संवाद प्रस्तुत किया गया है। संवाद के माध्यम से विद्यार्थी राज्यों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक तथा भौगोलिक स्वरूप को समझते हैं।

संवादात्मक शैली विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा में विचार व्यक्त करने तथा प्रश्नोत्तर करने के लिए प्रेरित करती है।

📜 श्लोक

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्।

प्रकृत्या संस्कृत्या च समृद्धं रमणीयकम्॥

श्लोक का मुख्य भाव पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक सौन्दर्य की ओर ध्यान आकर्षित करना है।

📖 महत्वपूर्ण शब्दार्थ

संस्कृत शब्द हिन्दी अर्थ
कोणः स्थान / दिशा का भाग
ऐशान्यम् उत्तर-पूर्व दिशा
मनोहरम् सुन्दर / मन को हरने वाला
प्रकृतिः प्राकृतिक स्वरूप
संस्कृतिः परम्परा एवं जीवन-पद्धति
समृद्धम् धन-सम्पन्न / सम्पन्न
रमणीयम् सुन्दर / मनोहर
प्रदेशः क्षेत्र / राज्य का भाग

🧭 दस दिशाएँ

दिशा संस्कृत नाम
पूर्व पूर्वदिशा
पश्चिम पश्चिमदिशा
उत्तर उत्तरदिशा
दक्षिण दक्षिणदिशा
उत्तर-पूर्व ईशान
दक्षिण-पूर्व आग्नेय
दक्षिण-पश्चिम नैऋत्य
उत्तर-पश्चिम वायव्य
ऊपर ऊर्ध्व
नीचे अधः

🎭 पूर्वोत्तर भारत की विशेषताएँ

🌳 प्राकृतिक सौन्दर्य

पर्वत, वन, नदियाँ, झरने और हरित वातावरण पूर्वोत्तर भारत को आकर्षक बनाते हैं।

🎨 सांस्कृतिक विविधता

विभिन्न समुदायों की परम्पराएँ, वेशभूषा, नृत्य और लोक-संस्कृति यहाँ की विशेषता हैं।

🏔️ पर्वतीय क्षेत्र

पूर्वोत्तर भारत के अनेक क्षेत्र पर्वतीय भू-भाग से युक्त हैं।

🌱 जैव-विविधता

यह क्षेत्र विविध वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं से समृद्ध है।

✍️ अभ्यास एवं प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को “सप्तभगिन्यः” कहा जाता है।
प्रश्न 2. “ऐशान्यम्” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: “ऐशान्यम्” का अर्थ उत्तर-पूर्व दिशा है।
प्रश्न 3. पूर्वोत्तर भारत की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: पूर्वोत्तर भारत की प्रमुख विशेषताओं में प्राकृतिक सौन्दर्य और सांस्कृतिक विविधता प्रमुख हैं।
प्रश्न 4. सप्तभगिनियों के सात राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर: असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैण्ड और त्रिपुरा।
प्रश्न 5. सिक्किम किस क्षेत्र का महत्वपूर्ण राज्य है?
उत्तर: सिक्किम पूर्वोत्तर भारत का महत्वपूर्ण राज्य है।

🎯 दक्षता आधारित प्रश्न

1. यदि कोई विद्यार्थी भारत के मानचित्र में उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित राज्यों को पहचानना चाहता है, तो वह किस प्रकार की जानकारी का उपयोग करेगा?
उत्तर: वह दिशाओं तथा भारत के मानचित्र की सहायता से उत्तर-पूर्वी राज्यों की पहचान कर सकता है।
2. “सप्तभगिन्यः” नाम से क्या भाव व्यक्त होता है?
उत्तर: इस नाम से पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों के आपसी संबंध एवं सामूहिक पहचान का भाव व्यक्त होता है।
3. पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक विविधता विद्यार्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: इससे विद्यार्थियों को भारत की भौगोलिक, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विविधता को समझने में सहायता मिलती है।

📝 MCQ Quiz – कक्षा 8 संस्कृत

1. “ऐशान्यम्” किस दिशा को कहते हैं?

(A) पश्चिम   (B) उत्तर-पूर्व   (C) दक्षिण   (D) दक्षिण-पश्चिम

उत्तर: (B) उत्तर-पूर्व

2. सप्तभगिन्यः में कितने राज्य हैं?

(A) पाँच   (B) छह   (C) सात   (D) आठ

उत्तर: (C) सात

3. निम्नलिखित में से कौन सप्तभगिनियों में सम्मिलित है?

(A) गुजरात   (B) असम   (C) महाराष्ट्र   (D) पंजाब

उत्तर: (B) असम

4. पूर्वोत्तर भारत की प्रमुख विशेषता क्या है?

(A) केवल मरुस्थल   (B) प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विविधता

उत्तर: (B)

5. निम्नलिखित में से कौन पूर्वोत्तर भारत का राज्य है?

(A) मिजोरम   (B) राजस्थान   (C) महाराष्ट्र   (D) हरियाणा

उत्तर: (A) मिजोरम

6. “मनोहरम्” का अर्थ है—

(A) कठिन   (B) सुन्दर   (C) छोटा   (D) दूर

उत्तर: (B) सुन्दर

7. सिक्किम किस क्षेत्र से संबंधित है?

(A) पूर्वोत्तर भारत   (B) दक्षिण भारत   (C) पश्चिम भारत   (D) मध्य भारत

उत्तर: (A) पूर्वोत्तर भारत

8. पूर्वोत्तर भारत का प्राकृतिक स्वरूप किससे संबंधित है?

(A) पर्वत और वन   (B) केवल मरुस्थल

उत्तर: (A)

9. “संस्कृतिः” का संबंध किससे है?

(A) परम्परा एवं जीवन-पद्धति   (B) केवल गणित

उत्तर: (A)

10. पाठ का मुख्य विषय क्या है?

(A) पूर्वोत्तर भारत का परिचय एवं सौन्दर्य

उत्तर: (A)

📚 परियोजना कार्य

परियोजना – पूर्वोत्तर भारत

विद्यार्थी किसी एक पूर्वोत्तर राज्य का चयन करके उसके संबंध में निम्नलिखित जानकारी एकत्र करें—

  • राज्य का नाम
  • राजधानी
  • भौगोलिक स्थिति
  • प्रमुख नदियाँ
  • प्राकृतिक विशेषताएँ
  • प्रमुख त्योहार
  • लोकनृत्य
  • प्रमुख पर्यटन स्थल
  • वेशभूषा एवं संस्कृति

परियोजना को चित्रों एवं मानचित्र के साथ सुन्दर रूप में प्रस्तुत करें।

🔁 त्वरित पुनरावृत्ति

याद रखें

सप्तभगिन्यः — पूर्वोत्तर भारत के सात राज्य।

मुख्य दिशा

ऐशान्यम् — उत्तर-पूर्व दिशा।

मुख्य विषय

पूर्वोत्तर भारत का प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक सौन्दर्य।

अध्ययन कौशल

मानचित्र, संवाद, शब्दार्थ एवं प्रश्नोत्तर।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 8 संस्कृत पाठ 8 का नाम क्या है?

कक्षा 8 संस्कृत पाठ 8 का नाम “पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्” है।

सप्तभगिन्यः किसे कहा जाता है?

पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को सामूहिक रूप से सप्तभगिन्यः कहा जाता है।

ऐशान्यम् का अर्थ क्या है?

ऐशान्यम् का अर्थ उत्तर-पूर्व दिशा है।

इस पाठ में किस क्षेत्र का वर्णन है?

इस पाठ में भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्राकृतिक, सांस्कृतिक तथा भौगोलिक स्वरूप का परिचय मिलता है।

कक्षा 8 संस्कृत | पाठ 8

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

शैक्षिक सामग्री • संस्कृत अध्ययन • अभ्यास • प्रश्नोत्तर

अयादि स्वर संधिः

📚 अयादि सन्धिः

कक्षा १० • संस्कृत व्याकरण • सन्धि

📖 अयादि सन्धेः परिभाषा

ए, ऐ, ओ, औ के बाद जब कोई स्वर आता है, तब क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् हो जाते हैं। इसे अयादि सन्धिः कहते हैं।

🔹 अयादि सन्धेः मुख्य नियमाः

१. ए + स्वर

ए + स्वर → अय्

उदाहरण — ने + अनम् = नयनम्

२. ऐ + स्वर

ऐ + स्वर → आय्

उदाहरण — गै + अकः = गायकः

३. ओ + स्वर

ओ + स्वर → अव्

उदाहरण — पो + अनम् = पवनम्

४. औ + स्वर

औ + स्वर → आव्

उदाहरण — पौ + अकः = पावकः

🧠 सरल सूत्र

ए → अय्    |    ऐ → आय्    |    ओ → अव्    |    औ → आव्

⭐ याद रखने की Trick:

ए के स्थान पर → अय्
ऐ के स्थान पर → आय्
ओ के स्थान पर → अव्
औ के स्थान पर → आव्

📝 अयादि सन्धिः — उदाहरणाः

क्र. सन्धि-विच्छेदः सन्धिः वाक्यम्
१ ने + अनम् नयनम् नयनं मनोहरम् अस्ति।
२ चे + अनम् चयनम् छात्रैः पुष्पाणां चयनं क्रियते।
३ शे + अनम् शयनम् बालकः शयनं करोति।
४ गे + अति गयति बालकः गीतं गायति।
५ धे + अनम् धयनम् धयनं सावधानीपूर्वकं करणीयम्।
६ ह्वे + अनम् ह्वयनम् गुरुः छात्रं ह्वयति।
७ से + अनम् सयनम् सयनं विश्रामाय भवति।
८ मे + अति मयति सः कार्यं मयति।
९ जै + अकः जायकः जायकः गीतं गायति।
१० गै + अकः गायकः गायकः मधुरं गायति।
११ नै + अकः नायकः नायकः सर्वान् मार्गदर्शनं करोति।
१२ दाय् + अकः दायकः दायकः सहायता करोति।
१३ ले + अनम् लयनम् नद्याः लयनं सागरे भवति।
१४ जे + अनम् जयनम् सैनिकस्य जयनं सर्वे इच्छन्ति।
१५ पे + अनम् पयनम् पयनं शीघ्रं भवति।
१६ सो + अनम् सवनम् सवनं वैदिकपरम्परायां प्रसिद्धम्।
१७ हो + अनम् हवनम् हवनं यज्ञे क्रियते।
१८ पो + अनम् पवनम् पवनः शीतलः अस्ति।
१९ भो + अनम् भवनम् भवनं सुन्दरम् अस्ति।
२० रो + अनम् रवनम् रवनं दूरात् श्रूयते।
२१ लो + अनम् लवनम् कृषकः धान्यस्य लवनं करोति।
२२ शो + अनम् शवनम् शवस्य संस्कारः करणीयः।
२३ चो + अनम् चवनम् चवनं औषधेषु प्रयुज्यते।
२४ क्षो + अनम् क्षवणम् क्षवणं शरीरस्य स्वाभाविकः क्रिया अस्ति।
२५ औ + अकः आवकः आवकः जनः आगच्छति।
२६ पौ + अकः पावकः पावकः अग्नेः नाम अस्ति।
२७ भौ + अनम् भावनम् सद्भावनं सर्वेषां हितकरम्।
२८ नौ + इकः नाविकः नाविकः नौकां चालयति।
२९ शौ + अकः शावकः शावकः मातुः समीपे अस्ति।
३० भौ + अकः भावकः भावकः भावं प्रकटयति।
३१ गौ + अक्षः गावाक्षः गावाक्षः गृहस्य शोभां वर्धयति।
३२ नौ + अयनम् नावयनम् नावयनं नदीपारे भवति।
३३ गो + अनम् गवनम् गोः गवनं ग्रामे दृश्यते।
३४ भो + अति भवति सः विद्यालयं गच्छति।
३५ सो + अति सवति सः कार्यं करोति।
३६ हो + अति हवति यजमानः हवति।
३७ पो + अनम् पवनम् पवनः वृक्षान् कम्पयति।
३८ लो + अनम् लवनम् लवनं कृषिकर्मणि आवश्यकम्।
३९ गै + अकः गायकः गायकः मधुरं गीतं गायति।
४० नै + अकः नायकः नायकः सर्वान् प्रेरयति।
४१ जै + अकः जायकः जायकः विजयस्य कारणं भवति।
४२ शै + अकः शायकः शायकः बाणं क्षिपति।
४३ से + अनम् सयनम् सयनं रात्रौ भवति।
४४ चे + अनम् चयनम् छात्रः योग्यस्य विषयस्य चयनं करोति।
४५ शे + अनम् शयनम् बालकः शयने स्वपिति।
४६ ने + अनम् नयनम् नयनं शरीरस्य महत्त्वपूर्णम् अङ्गम् अस्ति।
४७ भै + अकः भायकः भायकः भयस्य कारणं भवति।
४८ दै + अकः दायकः दायकः उपहारं ददाति।
४९ औ + त्सुक्यम् आवत्सुक्यम् बालकस्य अध्ययनस्य उत्सुकता अस्ति।
५० पौ + अकः पावकः पावकः प्रकाशं ददाति।

⭐ परीक्षोपयोगी सूत्रम्

ए + स्वरः → अय्

ऐ + स्वरः → आय्

ओ + स्वरः → अव्

औ + स्वरः → आव्

यण स्वर संधिः

📚 यण् सन्धिः

कक्षा १० • संस्कृत व्याकरण • सन्धि

📖 यण् सन्धेः परिभाषा

इक् अर्थात् इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ के बाद यदि कोई भिन्न स्वर आता है, तो क्रमशः य्, व्, र्, ल् हो जाता है। इसे यण् सन्धिः कहते हैं।

🔹 यण् सन्धेः मुख्य नियमाः

1. इ / ई

इ / ई + अन्य स्वर → य्

उदाहरण — इति + आदि = इत्यादि

2. उ / ऊ

उ / ऊ + अन्य स्वर → व्

उदाहरण — सु + आगतम् = स्वागतम्

3. ऋ / ॠ

ऋ / ॠ + अन्य स्वर → र्

उदाहरण — पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा

4. ऌ

ऌ + अन्य स्वर → ल्

ऌकार के प्रयोग के उदाहरण अत्यल्प हैं।

🧠 सरल सूत्र

इ / ई → य्    |    उ / ऊ → व्    |    ऋ / ॠ → र्    |    ऌ → ल्

⭐ याद रखें: जब इ, ई, उ, ऊ, ऋ आदि के बाद कोई दूसरा स्वर आता है, तब उनके स्थान पर क्रमशः य्, व्, र् आदि हो जाते हैं।

📝 यण् सन्धिः — ५० उदाहरणाः

क्र. सन्धि-विच्छेदः सन्धिः वाक्यम्
१ इति + आदि इत्यादि इत्यादि विषयाः पठनीयाः।
२ यदि + अपि यद्यपि यद्यपि सः बालकः अस्ति तथापि बुद्धिमान् अस्ति।
३ प्रति + एकम् प्रत्येकम् प्रत्येकं छात्रः पठति।
४ प्रति + उत्तरम् प्रत्युत्तरम् सः प्रश्नस्य प्रत्युत्तरं ददाति।
५ अति + अधिकम् अत्यधिकम् अत्यधिकं जलं न पातव्यम्।
६ अति + उत्तमम् अत्युत्तमम् एतत् अत्युत्तमं कार्यम् अस्ति।
७ अभि + आगतम् अभ्यागतम् अभ्यागतं जनं सत्कुर्यात्।
८ अभि + उदयः अभ्युदयः देशस्य अभ्युदयः भवतु।
९ अधि + अक्षः अध्याक्षः अध्याक्षः सभां चालयति।
१० अधि + अयनम् अध्ययनम् छात्राः मनोयोगेन अध्ययनं कुर्वन्ति।
११ इति + एव इत्येव इत्येव गुरुः अवदत्।
१२ यदि + एव यद्येव यद्येव सत्यं तर्हि वद।
१३ कवि + आलयः कव्यालयः कव्यालये कविताः सन्ति।
१४ शक्ति + अस्त्रम् शक्त्यस्त्रम् शक्त्यस्त्रं वीरस्य आयुधम् अस्ति।
१५ मति + अनुसारम् मत्यनुसारम् मत्यनुसारं निर्णयः भवति।
१६ नदी + अत्र नद्यत्र नद्यत्र निर्मला अस्ति।
१७ श्री + अनन्तः श्र्यनन्तः श्र्यनन्तस्य नाम प्रसिद्धम्।
१८ रवि + उदयः रव्युदयः रव्युदये जनाः जागरन्ति।
१९ गिरि + उपरि गिर्युपरि गिर्युपरि मन्दिरम् अस्ति।
२० हरि + अर्चना हर्यर्चना हर्यर्चना भक्त्या क्रियते।
२१ सु + आगतम् स्वागतम् भवतः स्वागतम् अस्ति।
२२ सु + अस्ति स्वस्ति सर्वेभ्यः स्वस्ति भवतु।
२३ अनु + एषणम् अन्वेषणम् छात्राः विषयस्य अन्वेषणं कुर्वन्ति।
२४ अनु + अयः अन्वयः शब्दानां अन्वयः करणीयः।
२५ सु + अस्ति स्वस्ति लोकानां स्वस्ति भवतु।
२६ अनु + इतः अन्वितः सः गुणैः अन्वितः अस्ति।
२७ बहु + अर्थः बह्वर्थः अस्य शब्दस्य बह्वर्थः अस्ति।
२८ गुरु + आदेशः गुर्वादेशः गुर्वादेशः सदैव पालनीयः।
२९ लघु + आहारः लघ्वाहारः लघ्वाहारः स्वास्थ्याय हितकरः।
३० मधु + आलयः मध्वालयः मध्वालये मधु सुलभम् अस्ति।
३१ वधू + आगमनम् वध्वागमनम् वध्वागमनं हर्षजनकम् अस्ति।
३२ भानु + उदयः भान्वुदयः भान्वुदये कमलानि विकसन्ति।
३३ साधु + आचारः साध्वाचारः साध्वाचारः सर्वैः पालनीयः।
३४ पितृ + आदेशः पित्रादेशः पित्रादेशः पुत्रेण पालनीयः।
३५ मातृ + आज्ञा मात्राज्ञा मात्राज्ञा बालकेन पालनीया।
३६ पितृ + अर्थम् पित्रर्थम् सः पित्रर्थं कार्यं करोति।
३७ मातृ + उपदेशः मात्रुपदेशः मात्रुपदेशः हितकरः अस्ति।
३८ पितृ + उपकारः पित्रुपकारः पित्रुपकारः स्मरणीयः अस्ति।
३९ कर्तृ + आदेशः कर्त्रादेशः कर्त्रादेशः सर्वैः मान्यः।
४० भ्रातृ + आगमनम् भ्रात्रागमनम् भ्रात्रागमने सर्वे प्रसन्नाः अभवन्।
४१ इति + उक्तम् इत्युक्तम् गुरुणा इत्युक्तम्।
४२ प्रति + आभरणम् प्रत्याभरणम् प्रत्याभरणं शोभनम् अस्ति।
४३ अति + आचारः अत्याचारः अत्याचारः कदापि न करणीयः।
४४ अति + आवश्यकम् अत्यावश्यकम् जलम् अत्यावश्यकम् अस्ति।
४५ अभि + आगमनम् अभ्यागमनम् अतिथेः अभ्यागमनं जातम्।
४६ अभि + अन्तरम् अभ्यन्तरम् गृहस्य अभ्यन्तरं स्वच्छम् अस्ति।
४७ उप + इन्द्रः उपेन्द्रः उपेन्द्रः विष्णोः नाम अस्ति।
४८ सु + ईक्षणम् स्वीक्षणम् कार्यस्य स्वीक्षणं करणीयम्।
४९ अनु + एषणम् अन्वेषणम् वैज्ञानिकाः नूतनस्य ज्ञानस्य अन्वेषणं कुर्वन्ति।
५० प्रति + अक्षम् प्रत्यक्षम् प्रत्यक्षं प्रमाणं महत्त्वपूर्णम् अस्ति।

⭐ परीक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण सूत्र

इ + स्वर = य्   →   इत्यादि

ई + स्वर = य्   →   प्रत्युत्तरम्

उ + स्वर = व्   →   अन्वेषणम्

ऊ + स्वर = व्   →   वध्वागमनम्

ऋ + स्वर = र्   →   पित्रादेशः
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