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Class_8_Lesson_9_कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?

कक्षा 8 संस्कृत • पाठ 9

कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?

Class 8 Sanskrit Chapter 9

पाठ-सार, शब्दार्थ, व्याकरण, श्लोक-व्याख्या, अभ्यास एवं PPT

📚 पाठ का परिचय

“कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?” पाठ में स्वास्थ्य, उचित आहार तथा आयुर्वेद से संबंधित महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत किए गए हैं।

पाठ का मुख्य संदेश है कि मनुष्य को हितकर भोजन करना चाहिए, भोजन की उचित मात्रा का ध्यान रखना चाहिए तथा ऋतु के अनुसार आहार-विहार अपनाना चाहिए।

मुख्य सूत्र: हितभुक् + मितभुक् + ऋतुभुक् = स्वस्थ जीवन

📊 Class 8 Sanskrit Chapter 9 PPT

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📖 पाठ-सार / Summary

पाठ में भगवान धन्वन्तरि के वाग्भट से संबंधित प्रसंग के माध्यम से स्वास्थ्य-संरक्षण का संदेश दिया गया है। धन्वन्तरि शक का रूप धारण करके विभिन्न प्रसिद्ध वैद्यों की परीक्षा लेते हैं।

अंततः वे वैद्य वाग्भट के समीप पहुँचते हैं और “कोऽरुक्?” अर्थात् “कौन स्वस्थ है?” जैसे प्रश्न के माध्यम से स्वास्थ्य का रहस्य जानना चाहते हैं।

वाग्भट इसका उत्तर तीन शब्दों में देते हैं— हितभुक्, मितभुक् और ऋतुभुक्। अर्थात् जो हितकर भोजन करता है, उचित मात्रा में भोजन करता है और ऋतु के अनुसार भोजन करता है, वह स्वस्थ रहने में सहायक जीवन-पद्धति अपनाता है।

पाठ की सीख: स्वास्थ्य के लिए केवल भोजन करना पर्याप्त नहीं है; भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और ऋतु के अनुकूलता का भी ध्यान रखना आवश्यक है।

🌿 पाठ के मुख्य विचार

शब्द सरल अर्थ मुख्य संदेश
हितभुक् हितकर भोजन करने वाला ऐसा भोजन करना जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो।
मितभुक् सीमित मात्रा में भोजन करने वाला भोजन उचित मात्रा में करना चाहिए।
ऋतुभुक् ऋतु के अनुसार भोजन करने वाला मौसम के अनुकूल भोजन करना चाहिए।

📝 महत्वपूर्ण शब्दार्थ

संस्कृत शब्द हिन्दी अर्थ English Meaning
निरामय नीरोग / स्वस्थ Healthy
अरुक् स्वस्थ / नीरोग One who is not sick
झटिति शीघ्र Quickly
हितभुक् हितकर भोजन करने वाला One who eats nutritious food
मितभुक् सीमित मात्रा में भोजन करने वाला One who eats food in limited quantity
ऋतुभुक् ऋतु के अनुसार भोजन करने वाला One who eats food appropriate to the season
अतिमात्रम् अत्यधिक मात्रा In excessive quantity
गरिष्ठम् जो कठिनता से पचे Difficult to digest
वर्णकान्तिजनकम् रूप-रंग निखारने वाला That which enhances beauty and complexion

🕉️ पाठ के महत्वपूर्ण श्लोक

श्लोक 1 का मुख्य भाव: ऐसा आहार ग्रहण करना चाहिए जिससे स्वास्थ्य बना रहे और उत्पन्न न हुए विकार उत्पन्न न हों।

श्लोक 2 का मुख्य भाव: भोजन की मात्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भारी भोजन कम मात्रा में तथा हल्का भोजन भी उचित मात्रा में लेना चाहिए।

श्लोक 3 का मुख्य भाव: ऋतु के अनुकूल आहार-विहार से बल, स्वास्थ्य और शरीर की प्रसन्नता में वृद्धि होती है।

श्लोक 4 का मुख्य भाव: प्रातः उठकर व्यायाम, दाँतों की सफाई, स्वच्छ जल से स्नान तथा भूख लगने पर भोजन करना चाहिए।

श्लोक 5 का मुख्य भाव: सभी लोग सुखी और निरोग रहें, सभी का कल्याण हो तथा किसी को दुःख प्राप्त न हो।

📘 व्याकरण — विशेषण एवं विशेष्य

इस पाठ में विशेषण और विशेष्य का प्रयोग समझाया गया है।

विशेषण: जो शब्द किसी व्यक्ति, वस्तु या पद की विशेषता बताता है।

विशेष्य: जिस शब्द की विशेषता बताई जाती है, वह विशेष्य कहलाता है।

विशेषण-विशेष्य में समानता

  • विशेषण का लिंग विशेष्य के लिंग के अनुसार होता है।
  • विशेषण का वचन विशेष्य के वचन के अनुसार होता है।
  • विशेषण की विभक्ति विशेष्य की विभक्ति के अनुसार होती है।
विशेषण विशेष्य
उत्तमः बालकः
उत्तमा बालिका
उत्तमम् चित्रम्

✍️ अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

  1. धन्वन्तरि ने किस रूप को धारण किया?
  2. धन्वन्तरि ने किस वैद्य की परीक्षा ली?
  3. “कोऽरुक्” का क्या अर्थ है?
  4. हितभुक्, मितभुक् और ऋतुभुक् से क्या अभिप्राय है?
  5. ऋतुभुक् के अनुसार भोजन करने का क्या लाभ है?
  6. विशेषण और विशेष्य में क्या संबंध है?
  7. स्वास्थ्य-संरक्षण के लिए पाठ में कौन-कौन से उपाय बताए गए हैं?
  8. भगवान धन्वन्तरि ने वाग्भट को क्या संदेश दिया?

🎯 पाठ से क्या सीखें?

  • स्वास्थ्य के लिए हितकर आहार अपनाना चाहिए।
  • भोजन की मात्रा का ध्यान रखना चाहिए।
  • ऋतु के अनुसार भोजन और आचरण करना चाहिए।
  • प्रतिदिन स्वच्छता और व्यायाम का ध्यान रखना चाहिए।
  • स्वास्थ्य-संरक्षण के लिए नियमित जीवन-पद्धति आवश्यक है।

❓ Frequently Asked Questions (FAQ)

प्रश्न: कक्षा 8 संस्कृत पाठ 9 का नाम क्या है?

उत्तर: पाठ 9 का नाम “कोऽरुक्? कोऽरुक्? कोऽरुक्?” है।

प्रश्न: “कोऽरुक्” का अर्थ क्या है?

उत्तर: इसका भाव है—कौन स्वस्थ या नीरोग है?

प्रश्न: हितभुक् किसे कहा गया है?

उत्तर: जो स्वास्थ्य के लिए हितकर भोजन करता है, उसे हितभुक् कहा गया है।

प्रश्न: मितभुक् किसे कहा गया है?

उत्तर: जो उचित या सीमित मात्रा में भोजन करता है, वह मितभुक् है।

प्रश्न: ऋतुभुक् का क्या अर्थ है?

उत्तर: जो ऋतु के अनुकूल भोजन करता है, उसे ऋतुभुक् कहा गया है।

🔍 परियोजना कार्य

  • विद्यालय परिसर में पाए जाने वाले पाँच वृक्षों के नाम और उनके औषधीय प्रयोग लिखें।
  • स्वास्थ्य से संबंधित श्लोकों का संग्रह करें।
  • पाठ में आए महत्वपूर्ण श्लोकों को कंठस्थ करके कक्षा में सुनाएँ।

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© अध्ययन सामग्री • Class 8 Sanskrit Chapter 9

CLASS_8_PPT_8_पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

कक्षा 8 • संस्कृत

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

पाठ 8 — पूर्वोत्तर भारत का मनोहर परिचय

शब्दार्थ • पाठ-विषय • संस्कृत सामग्री • अभ्यास • प्रश्नोत्तर • MCQ

पाठ का परिचय

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् पाठ में भारत के उत्तर-पूर्वी भाग की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक तथा भौगोलिक विशेषताओं का परिचय प्रस्तुत किया गया है।

इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न राज्यों, उनकी प्राकृतिक सुंदरता तथा सांस्कृतिक विशेषताओं को समझने का अवसर मिलता है।

📊 कक्षा 8 संस्कृत पाठ 8 की PPT

इस पाठ को कक्षा में आकर्षक ढंग से पढ़ाने के लिए पाठ की विस्तृत PowerPoint Presentation उपलब्ध है।

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पाठ 8 – पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम् : संक्षिप्त जानकारी

कक्षा

कक्षा 8 संस्कृत

पाठ

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

मुख्य विषय

पूर्वोत्तर भारत, प्रकृति, संस्कृति और भूगोल

भाषा

संस्कृत

🌏 पूर्वोत्तर भारत के राज्य

पाठ में भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के राज्यों का परिचय दिया गया है। पूर्वोत्तर भारत को प्राकृतिक सौन्दर्य, पर्वतों, नदियों, वनों, जनजातीय संस्कृति तथा विविध परम्पराओं के लिए जाना जाता है।

1. असम

असम पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य है।

2. अरुणाचल प्रदेश

पर्वतीय प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध राज्य।

3. मेघालय

पर्वतों, जलप्रपातों और हरित प्राकृतिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध।

4. मणिपुर

प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक विविधता वाला पूर्वोत्तर राज्य।

5. मिजोरम

पहाड़ी भू-भाग और प्राकृतिक सौन्दर्य से युक्त राज्य।

6. नागालैण्ड

विविध जनजातीय परम्पराओं एवं संस्कृति के लिए प्रसिद्ध।

7. त्रिपुरा

पूर्वोत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य।

8. सिक्किम

हिमालयी प्राकृतिक सौन्दर्य से सम्पन्न राज्य।

👭 सप्तभगिन्यः

पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को सामूहिक रूप से “सप्तभगिन्यः” कहा जाता है।

ये सात राज्य हैं — असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैण्ड और त्रिपुरा।

सिक्किम को पाठ के संदर्भ में पूर्वोत्तर क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

💬 पाठ का संवाद

पाठ में विद्यार्थियों के मध्य पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के संबंध में संवाद प्रस्तुत किया गया है। संवाद के माध्यम से विद्यार्थी राज्यों के प्राकृतिक, सांस्कृतिक तथा भौगोलिक स्वरूप को समझते हैं।

संवादात्मक शैली विद्यार्थियों को संस्कृत भाषा में विचार व्यक्त करने तथा प्रश्नोत्तर करने के लिए प्रेरित करती है।

📜 श्लोक

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्।

प्रकृत्या संस्कृत्या च समृद्धं रमणीयकम्॥

श्लोक का मुख्य भाव पूर्वोत्तर भारत के प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक सौन्दर्य की ओर ध्यान आकर्षित करना है।

📖 महत्वपूर्ण शब्दार्थ

संस्कृत शब्द हिन्दी अर्थ
कोणः स्थान / दिशा का भाग
ऐशान्यम् उत्तर-पूर्व दिशा
मनोहरम् सुन्दर / मन को हरने वाला
प्रकृतिः प्राकृतिक स्वरूप
संस्कृतिः परम्परा एवं जीवन-पद्धति
समृद्धम् धन-सम्पन्न / सम्पन्न
रमणीयम् सुन्दर / मनोहर
प्रदेशः क्षेत्र / राज्य का भाग

🧭 दस दिशाएँ

दिशा संस्कृत नाम
पूर्व पूर्वदिशा
पश्चिम पश्चिमदिशा
उत्तर उत्तरदिशा
दक्षिण दक्षिणदिशा
उत्तर-पूर्व ईशान
दक्षिण-पूर्व आग्नेय
दक्षिण-पश्चिम नैऋत्य
उत्तर-पश्चिम वायव्य
ऊपर ऊर्ध्व
नीचे अधः

🎭 पूर्वोत्तर भारत की विशेषताएँ

🌳 प्राकृतिक सौन्दर्य

पर्वत, वन, नदियाँ, झरने और हरित वातावरण पूर्वोत्तर भारत को आकर्षक बनाते हैं।

🎨 सांस्कृतिक विविधता

विभिन्न समुदायों की परम्पराएँ, वेशभूषा, नृत्य और लोक-संस्कृति यहाँ की विशेषता हैं।

🏔️ पर्वतीय क्षेत्र

पूर्वोत्तर भारत के अनेक क्षेत्र पर्वतीय भू-भाग से युक्त हैं।

🌱 जैव-विविधता

यह क्षेत्र विविध वनस्पतियों एवं जीव-जंतुओं से समृद्ध है।

✍️ अभ्यास एवं प्रश्नोत्तर

प्रश्न 1. पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर: पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को “सप्तभगिन्यः” कहा जाता है।
प्रश्न 2. “ऐशान्यम्” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: “ऐशान्यम्” का अर्थ उत्तर-पूर्व दिशा है।
प्रश्न 3. पूर्वोत्तर भारत की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: पूर्वोत्तर भारत की प्रमुख विशेषताओं में प्राकृतिक सौन्दर्य और सांस्कृतिक विविधता प्रमुख हैं।
प्रश्न 4. सप्तभगिनियों के सात राज्यों के नाम लिखिए।
उत्तर: असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, मिजोरम, नागालैण्ड और त्रिपुरा।
प्रश्न 5. सिक्किम किस क्षेत्र का महत्वपूर्ण राज्य है?
उत्तर: सिक्किम पूर्वोत्तर भारत का महत्वपूर्ण राज्य है।

🎯 दक्षता आधारित प्रश्न

1. यदि कोई विद्यार्थी भारत के मानचित्र में उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित राज्यों को पहचानना चाहता है, तो वह किस प्रकार की जानकारी का उपयोग करेगा?
उत्तर: वह दिशाओं तथा भारत के मानचित्र की सहायता से उत्तर-पूर्वी राज्यों की पहचान कर सकता है।
2. “सप्तभगिन्यः” नाम से क्या भाव व्यक्त होता है?
उत्तर: इस नाम से पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों के आपसी संबंध एवं सामूहिक पहचान का भाव व्यक्त होता है।
3. पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक विविधता विद्यार्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: इससे विद्यार्थियों को भारत की भौगोलिक, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विविधता को समझने में सहायता मिलती है।

📝 MCQ Quiz – कक्षा 8 संस्कृत

1. “ऐशान्यम्” किस दिशा को कहते हैं?

(A) पश्चिम   (B) उत्तर-पूर्व   (C) दक्षिण   (D) दक्षिण-पश्चिम

उत्तर: (B) उत्तर-पूर्व

2. सप्तभगिन्यः में कितने राज्य हैं?

(A) पाँच   (B) छह   (C) सात   (D) आठ

उत्तर: (C) सात

3. निम्नलिखित में से कौन सप्तभगिनियों में सम्मिलित है?

(A) गुजरात   (B) असम   (C) महाराष्ट्र   (D) पंजाब

उत्तर: (B) असम

4. पूर्वोत्तर भारत की प्रमुख विशेषता क्या है?

(A) केवल मरुस्थल   (B) प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विविधता

उत्तर: (B)

5. निम्नलिखित में से कौन पूर्वोत्तर भारत का राज्य है?

(A) मिजोरम   (B) राजस्थान   (C) महाराष्ट्र   (D) हरियाणा

उत्तर: (A) मिजोरम

6. “मनोहरम्” का अर्थ है—

(A) कठिन   (B) सुन्दर   (C) छोटा   (D) दूर

उत्तर: (B) सुन्दर

7. सिक्किम किस क्षेत्र से संबंधित है?

(A) पूर्वोत्तर भारत   (B) दक्षिण भारत   (C) पश्चिम भारत   (D) मध्य भारत

उत्तर: (A) पूर्वोत्तर भारत

8. पूर्वोत्तर भारत का प्राकृतिक स्वरूप किससे संबंधित है?

(A) पर्वत और वन   (B) केवल मरुस्थल

उत्तर: (A)

9. “संस्कृतिः” का संबंध किससे है?

(A) परम्परा एवं जीवन-पद्धति   (B) केवल गणित

उत्तर: (A)

10. पाठ का मुख्य विषय क्या है?

(A) पूर्वोत्तर भारत का परिचय एवं सौन्दर्य

उत्तर: (A)

📚 परियोजना कार्य

परियोजना – पूर्वोत्तर भारत

विद्यार्थी किसी एक पूर्वोत्तर राज्य का चयन करके उसके संबंध में निम्नलिखित जानकारी एकत्र करें—

  • राज्य का नाम
  • राजधानी
  • भौगोलिक स्थिति
  • प्रमुख नदियाँ
  • प्राकृतिक विशेषताएँ
  • प्रमुख त्योहार
  • लोकनृत्य
  • प्रमुख पर्यटन स्थल
  • वेशभूषा एवं संस्कृति

परियोजना को चित्रों एवं मानचित्र के साथ सुन्दर रूप में प्रस्तुत करें।

🔁 त्वरित पुनरावृत्ति

याद रखें

सप्तभगिन्यः — पूर्वोत्तर भारत के सात राज्य।

मुख्य दिशा

ऐशान्यम् — उत्तर-पूर्व दिशा।

मुख्य विषय

पूर्वोत्तर भारत का प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक सौन्दर्य।

अध्ययन कौशल

मानचित्र, संवाद, शब्दार्थ एवं प्रश्नोत्तर।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 8 संस्कृत पाठ 8 का नाम क्या है?

कक्षा 8 संस्कृत पाठ 8 का नाम “पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्” है।

सप्तभगिन्यः किसे कहा जाता है?

पूर्वोत्तर भारत के सात राज्यों को सामूहिक रूप से सप्तभगिन्यः कहा जाता है।

ऐशान्यम् का अर्थ क्या है?

ऐशान्यम् का अर्थ उत्तर-पूर्व दिशा है।

इस पाठ में किस क्षेत्र का वर्णन है?

इस पाठ में भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्राकृतिक, सांस्कृतिक तथा भौगोलिक स्वरूप का परिचय मिलता है।

कक्षा 8 संस्कृत | पाठ 8

पश्यत् कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

शैक्षिक सामग्री • संस्कृत अध्ययन • अभ्यास • प्रश्नोत्तर

अयादि स्वर संधिः

📚 अयादि सन्धिः

कक्षा १० • संस्कृत व्याकरण • सन्धि

📖 अयादि सन्धेः परिभाषा

ए, ऐ, ओ, औ के बाद जब कोई स्वर आता है, तब क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् हो जाते हैं। इसे अयादि सन्धिः कहते हैं।

🔹 अयादि सन्धेः मुख्य नियमाः

१. ए + स्वर

ए + स्वर → अय्

उदाहरण — ने + अनम् = नयनम्

२. ऐ + स्वर

ऐ + स्वर → आय्

उदाहरण — गै + अकः = गायकः

३. ओ + स्वर

ओ + स्वर → अव्

उदाहरण — पो + अनम् = पवनम्

४. औ + स्वर

औ + स्वर → आव्

उदाहरण — पौ + अकः = पावकः

🧠 सरल सूत्र

ए → अय्    |    ऐ → आय्    |    ओ → अव्    |    औ → आव्

⭐ याद रखने की Trick:

ए के स्थान पर → अय्
ऐ के स्थान पर → आय्
ओ के स्थान पर → अव्
औ के स्थान पर → आव्

📝 अयादि सन्धिः — उदाहरणाः

क्र. सन्धि-विच्छेदः सन्धिः वाक्यम्
१ ने + अनम् नयनम् नयनं मनोहरम् अस्ति।
२ चे + अनम् चयनम् छात्रैः पुष्पाणां चयनं क्रियते।
३ शे + अनम् शयनम् बालकः शयनं करोति।
४ गे + अति गयति बालकः गीतं गायति।
५ धे + अनम् धयनम् धयनं सावधानीपूर्वकं करणीयम्।
६ ह्वे + अनम् ह्वयनम् गुरुः छात्रं ह्वयति।
७ से + अनम् सयनम् सयनं विश्रामाय भवति।
८ मे + अति मयति सः कार्यं मयति।
९ जै + अकः जायकः जायकः गीतं गायति।
१० गै + अकः गायकः गायकः मधुरं गायति।
११ नै + अकः नायकः नायकः सर्वान् मार्गदर्शनं करोति।
१२ दाय् + अकः दायकः दायकः सहायता करोति।
१३ ले + अनम् लयनम् नद्याः लयनं सागरे भवति।
१४ जे + अनम् जयनम् सैनिकस्य जयनं सर्वे इच्छन्ति।
१५ पे + अनम् पयनम् पयनं शीघ्रं भवति।
१६ सो + अनम् सवनम् सवनं वैदिकपरम्परायां प्रसिद्धम्।
१७ हो + अनम् हवनम् हवनं यज्ञे क्रियते।
१८ पो + अनम् पवनम् पवनः शीतलः अस्ति।
१९ भो + अनम् भवनम् भवनं सुन्दरम् अस्ति।
२० रो + अनम् रवनम् रवनं दूरात् श्रूयते।
२१ लो + अनम् लवनम् कृषकः धान्यस्य लवनं करोति।
२२ शो + अनम् शवनम् शवस्य संस्कारः करणीयः।
२३ चो + अनम् चवनम् चवनं औषधेषु प्रयुज्यते।
२४ क्षो + अनम् क्षवणम् क्षवणं शरीरस्य स्वाभाविकः क्रिया अस्ति।
२५ औ + अकः आवकः आवकः जनः आगच्छति।
२६ पौ + अकः पावकः पावकः अग्नेः नाम अस्ति।
२७ भौ + अनम् भावनम् सद्भावनं सर्वेषां हितकरम्।
२८ नौ + इकः नाविकः नाविकः नौकां चालयति।
२९ शौ + अकः शावकः शावकः मातुः समीपे अस्ति।
३० भौ + अकः भावकः भावकः भावं प्रकटयति।
३१ गौ + अक्षः गावाक्षः गावाक्षः गृहस्य शोभां वर्धयति।
३२ नौ + अयनम् नावयनम् नावयनं नदीपारे भवति।
३३ गो + अनम् गवनम् गोः गवनं ग्रामे दृश्यते।
३४ भो + अति भवति सः विद्यालयं गच्छति।
३५ सो + अति सवति सः कार्यं करोति।
३६ हो + अति हवति यजमानः हवति।
३७ पो + अनम् पवनम् पवनः वृक्षान् कम्पयति।
३८ लो + अनम् लवनम् लवनं कृषिकर्मणि आवश्यकम्।
३९ गै + अकः गायकः गायकः मधुरं गीतं गायति।
४० नै + अकः नायकः नायकः सर्वान् प्रेरयति।
४१ जै + अकः जायकः जायकः विजयस्य कारणं भवति।
४२ शै + अकः शायकः शायकः बाणं क्षिपति।
४३ से + अनम् सयनम् सयनं रात्रौ भवति।
४४ चे + अनम् चयनम् छात्रः योग्यस्य विषयस्य चयनं करोति।
४५ शे + अनम् शयनम् बालकः शयने स्वपिति।
४६ ने + अनम् नयनम् नयनं शरीरस्य महत्त्वपूर्णम् अङ्गम् अस्ति।
४७ भै + अकः भायकः भायकः भयस्य कारणं भवति।
४८ दै + अकः दायकः दायकः उपहारं ददाति।
४९ औ + त्सुक्यम् आवत्सुक्यम् बालकस्य अध्ययनस्य उत्सुकता अस्ति।
५० पौ + अकः पावकः पावकः प्रकाशं ददाति।

⭐ परीक्षोपयोगी सूत्रम्

ए + स्वरः → अय्

ऐ + स्वरः → आय्

ओ + स्वरः → अव्

औ + स्वरः → आव्
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