ऋतुराजः वसन्तः
परिचय (Introduction): प्रस्तुत पाठ में प्रकृति के राजा 'वसंत ऋतु' के आगमन, उसके सौंदर्य, प्राकृतिक उपादानों (फूल, भौरे, नदियाँ, वृक्ष और लताएँ) तथा प्रकृति में होने वाले मनमोहक परिवर्तनों का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। आइए इसका पंक्ति-दर-पंक्ति हिंदी अनुवाद देखें।
🌿 गद्यांश 1: वसंत का स्वागत एवं प्रकृति का उल्लास
वाक्य 1
स्वागतं ते ऋतुराज ! त्वमेव कुसुमाकरः।
हिंदी अनुवाद
हे ऋतुराज (ऋतुओं के राजा वसंत)! तुम्हारा स्वागत है! तुम ही कुसुमाकर (फूलों की खान/ऋतुराज) हो।
वाक्य 2
तवागमने भवति पुष्पाणां विकासः, सौरभाणां च प्रसारः।
हिंदी अनुवाद
तुम्हारे आगमन पर फूलों का विकास (खिलना) होता है और सुगंधों (सौरभ) का प्रसार होता है।
वाक्य 3
अतः तव आगमनं सर्वान् जनान् आनन्दयति, निखिलान् प्राणिनः प्रीणयति, चराचरं च रमयति।
हिंदी अनुवाद
अतः तुम्हारा आगमन सभी मनुष्यों को आनंदित करता है, संपूर्ण प्राणियों को प्रसन्न करता है और चराचर (स्थावर और जंगम) जगत को रमणीय (सुखद) बनाता है।
वाक्य 4
इदानीं जडता विलीयते, मलिनता अपगता भवति, स्वच्छता एव दृश्यते परितः।
हिंदी अनुवाद
अब सर्दी की जडता (सुस्ती) विलीन हो जाती है, गंदगी दूर हो जाती है, और चारों तरफ स्वच्छता ही दिखाई देती है।
🌊 गद्यांश 2: निर्मल आकाश, नदियाँ और कमल वन
वाक्य 5
पश्यतु मनाक् निर्मलम् आकाशम्।
हिंदी अनुवाद
देखो, ज़रा देखो—आकाश कितना निर्मल (स्वच्छ) है।
वाक्य 6
स्वच्छाः दिशः प्रसन्ना इव भान्ति अद्य।
हिंदी अनुवाद
आज दिशाएँ स्वच्छ और प्रसन्न सी प्रतीत हो रही हैं।
वाक्य 7
सर्वत्र तडागेषु नदीषु कुल्यासु सरसु च राजते विमलं वारि।
हिंदी अनुवाद
सभी जगह तालाबों, नदियों, नहरों और झीलों में निर्मल जल शोभायमान हो रहा है।
वाक्य 8
क्वचित् मुकुलितानि अपरत्र प्रफुल्लितानि कमलवनानि।
हिंदी अनुवाद
कहीं कलियों से युक्त और कहीं पूरी तरह खिले हुए कमलों के वन सुशोभित हो रहे हैं।
वाक्य 9
विकसितानां पङ्कजानां शोभा कस्य मनो न हरति !
हिंदी अनुवाद
खिले हुए कमलों की यह शोभा किसके मन को नहीं हर लेती (मोहित नहीं करती)!
🐝 गद्यांश 3: वनों की शोभा, भौरे, कोयल और लताएँ
वाक्य 10
वनेषु, वाटिकासु, उद्यानेषु च नानावर्णाणि पुष्पाणि शोभन्ते।
हिंदी अनुवाद
वनों, बगीचों और उद्यानों में भाँति-भाँति के रंगों वाले फूल शोभा दे रहे हैं।
वाक्य 11
पुष्पाणामुपरि गुञ्जन्ति भ्रमराः।
हिंदी अनुवाद
फूलों के ऊपर भौरे गूंज (गुंजन) कर रहे हैं।
वाक्य 12
ते च प्रियाभिः सह सानन्दं मधूनि पिबन्ति, मधुना मत्तः पिको मधुरं कूजति, तदीयं ध्वनिं बालकाः अनुकुर्वन्ति।
हिंदी अनुवाद
और वे अपनी प्रियाओं के साथ आनंदपूर्वक मकरंद (मधु) पीते हैं। मधु (परागण/मदिरा) से मतवाला हुआ कोयल मीठा कूकता है, और उसकी इस ध्वनि का अनुकरण (नकल) बालक करते हैं।
वाक्य 13
वृक्षेषु नवपल्लवाः विराजन्ते। आम्रेषु मञ्जरीः संलग्नाः।
हिंदी अनुवाद
पेड़ों पर नए कोमल पत्ते (नवपल्लव) शोभा पा रहे हैं। आमों के पेड़ों पर बौर (मञ्जरी) लग गई हैं।
वाक्य 14
कुसुमितं सहकारमाश्रित्य लता प्रमुदिता। रसाले सङ्गता लता लोकानां मनांसि हरति।
हिंदी अनुवाद
फूलों से लदे हुए आम के पेड़ का आश्रय लेकर लता प्रमुदित (प्रसन्न) हो जाती है। आम के पेड़ से लिपटी हुई यह लता लोगों के मन को मोह लेती है।
वाक्य 15
पक्षिणां कलकूजनमपि सर्वेषां सुखदं भवति।
हिंदी अनुवाद
पक्षियों का मधुर कलकूजन भी सभी के लिए सुखद होता है।
🌸 गद्यांश 4: भौरों का मधुपान और प्रेम
वाक्य 16
अद्यत्वे मधुतः आधिक्यम्; पुष्पेषु मधूनि भवन्ति, मञ्जरीषु च भवन्ति।
हिंदी अनुवाद
इन दिनों शहद (मकरंद) की अधिकता होती है; फूलों में और आम की मंजरी में मधु होता है।
वाक्य 17
मधुनि, मधुने लोलुपाः चञ्चरीकाः यदा प्रमादं कुर्वन्ति तदा तेषां पक्षाः संसक्ता भवन्ति, मधुना संशलिष्टतया ते कदाचित् उड्डयितुं न पारयन्ति।
हिंदी अनुवाद
शहद के प्रति अत्यधिक लालची (लोलुप) भौरे जब असावधानी (प्रमाद) करते हैं, तब उनके पंख चिपक जाते हैं। मधु से आपस में चिपक जाने के कारण वे कभी-कभी उड़ने में असमर्थ हो जाते हैं।
वाक्य 18
तथापि मधुनि तादृशः स्वादः भवति येन ते ततो न विरमन्ति, अपि तु अनवरतं तत्र स्वानुरागं प्रकटयन्ति।
हिंदी अनुवाद
फिर भी, उस शहद में ऐसा अद्भुत स्वाद होता है कि वे उससे विरत (दूर) नहीं होते, बल्कि निरंतर उसके प्रति अपना प्रेम (स्वानुराग) प्रकट करते रहते हैं।
🌬️ गद्यांश 5: सरसों के फूल और मन्द पवन
वाक्य 19
सर्षपः पीतं वसनं दधानः प्रकटयति वासन्तिकं विलासम।
हिंदी अनुवाद
सरसों का पौधा पीले रंग का वस्त्र धारण किए हुए वसंत की सुंदरता (विलास) को प्रकट कर रहा है।
वाक्य 20
पुष्पेभ्यः सौरभं, वारिभ्यः शीतलतां चादाय प्रवहति मन्दः पवनः।
हिंदी अनुवाद
फूलों से सुगंध और जल से शीतलता लेकर मन्द-मन्द हवा बह रही है।
वाक्य 21
पवनेन आन्दोलिता मन्दं मन्दं कम्पमाना लता नर्त्कीव नृत्यन्ती प्रतीयते।
हिंदी अनुवाद
हवा से हिलती हुई और धीरे-धीरे काँपती हुई लता ऐसी प्रतीत होती है मानो कोई नर्तकी (नृत्य करने वाली) नृत्य कर रही हो।
💃 गद्यांश 6: प्रकृति का उल्लास और सबका आनंद
वाक्य 22
अस्मिन् समये प्रमुदिताः सर्वे जनाः समूहं रचयित्वा प्रकृतिशोभां पश्यन्तः भ्रमन्ति।
हिंदी अनुवाद
इस समय सभी प्रसन्न लोग समूह बनाकर प्रकृति की शोभा देखते हुए घूमते हैं।
वाक्य 23
उद्यानेषु, वाटिकासु, नदीतटेषु च क्वचित् गायन्ति लोकाः। अपरत्र नृत्यन्ति कूर्दन्ति च बालकाः।
हिंदी अनुवाद
उद्यानों, बगीचों और नदी के तटों पर कहीं लोग गाते हैं। दूसरी ओर बालक नाचते और कूदते हैं।
वाक्य 24
न केवलं मानवाः एव अपि तु पशवः पक्षिणः चापि प्रमुदिताः भवन्ति वसन्ते।
हिंदी अनुवाद
वसंत ऋतु में केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु और पक्षी भी अत्यंत प्रसन्न होते हैं।